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तबाही

shafaque rauf

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिसे दवा समझ कर मैं सहलाती रही,
        
                                                    
                            
वो शख़्स मेरी जड़ों में ज़हर घोलता रहा।
ज़मीं पैरों से खिसकी तो होश आया मुझे,
कि मैं क्यूँ सारे गिले-शिकवे भुलाती रही।
मेरी तीमारदारी का ये सिला दिया तूने,
मैं वफ़ा बुनती रही,
तू साज़िशें बुनता रहा।


- शफ़क़ रऊफ
3 महीने पहले
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