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काश यह कह पाती

shafaque rauf

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सबर इस बात पर हुई...
        
                                                    
                            
मेरे ख़्वाबों को सच
करने वाले माँ बाप
अब लाग़र हो गए हैं

सोचकर आँखें भर आईं
उनके बाद मेरे लिए
रातों की नींद खराब कर
आसमान से
तारे कौन तोड़ लाएगा

सच बोलूँ तो
कोई जतन भी
ना करेगा
जतन ना करेगा

अफसोस इस
बात पर हुई
कि मैं उनके
अनगिनत
सपनों को
कभी मुट्ठी में
न कैद कर
सकी

कभी उनसे
कह न सकी
कोई भी इक
सपना मिरा
मुझे
उनके ऑंखों
की हंसी
उनके लबों
के मुस्कान
और
उनके
सकून
भरी
आह से
प्यारी नहीं
-डा.शफ़क़
 
2 वर्ष पहले
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