विज्ञापन

एहसास- ए- दिल

shafaque rauf

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दौलत का मिलना भी यहाँ आसां रहा मगर
        
                                                    
                            
दामन खुशी से अपना भरना महाल था
लोगों की इस भीड़ को पाना था सहल पर
एहसास-ए-दिल का कोई उभरना महाल था
रुतबा, मकाम, नाम तो मिल ही गया हमें
मगर खुल के मुस्कुराना, वो हँसना महाल था
काँटों पे चल के पार तो हम हो गए मगर
वफ़ा के उस मुसाफ़िर का खोना महाल था
अपनों के रूप में तो मिले सैकड़ों यहाँ
मगर कोई एक शख़्स अपना होना महाल था
-शफ़क़ रऊफ
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile