विज्ञापन

प्रकाश या तम, कौन सर्वोत्तम

Seebee singh dailwar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक समय प्रकृति के दो रूप झगड़ते हैं,
        
                                                    
                            
कौन बड़ा है, कौन है छोटा इस बात पे लड़ते हैं।

मैं हूं प्रकाश, दूजा नाम है मेरा उजाला,
सच कहूं तो दुनियां में, है मेरा ही बोलबाला।
ये है मेरा भाई, जो सबको डराता है,
अंधकार है नाम इसी का, छोटा कहलाता है।

चलो भाई सहमत हो जाऊं,अगर कोई मैं तर्क जो पाऊं,
तुम अपनी ख़ूबियां गिनाओ, मैं भी थोड़ा सतर्क हो जाऊं।

मुझमें होता है निर्माण, मैं हूं तो है सबकी पहचान,
सब बंदोबस्त हैं मेरे ख़ातिर, सब करते मेरा सम्मान,

तुम जिसको निर्माण कहते हो, वो सच में हाहाकार है,
सच तो ये है कि मुझसे ही जीवन का आधार है ।
मेरे होते सृजन होता, तुम हो तो विध्वंश
धरती माता पर चलता यूं ही जीवों का वंश।
निशा होते ही सब निद्रा लेते, तब आगे बढ़ते है,

एक समय प्रकृति के दो रूप झगड़ते हैं,
कौन बड़ा है, कौन है छोटा इस बात पे लड़ते हैं।

मैं हूं एक दिव्यशक्ति ही, देखे न मेरे रंग भला क्यों,
धरती पर जन जन करता है, मेरे लिए जंग भला क्यों।

मुझमें है समता का भाव, बड़ी अदब से कहता हूं,
प्रकृति का पुत्र हूं मैं, प्राकृतिक ही रहता हूं।

शंका न कर, मुझपे यक़ीं कर, मैं तेरा ज्येष्ठ हूं ,
मैं ही नहीं ये दुनियां बोले, मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं ।

निर्बाध हूं, निराकार हूं, हां मैं तम हूं,
कहता हूं मैं बड़े फ़ख़्र से मैं सर्वोत्तम हूं।
अपनी अपनी दलीलों पर दोनों अड़ते हैं।

एक समय प्रकृति के दो रूप झगड़ते हैं,
कौन बड़ा है, कौन है छोटा इस बात पे लड़ते हैं।
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Pandit Chandradutt

2936 कविताएं

View Profile

malti gupta

16 कविताएं

View Profile

Md Iftekhar

4 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

650 कविताएं

View Profile