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वक्त के साथ बदलते रिश्ते

Saurabh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फोन उठाना भी रिश्तों की कहानी कहता है,
        
                                                    
                            
किसे कितना चाहें, समय ही तय करता है।

कभी हर आवाज़ पर दिल दौड़ पड़ता था,
आज वही नाम स्क्रीन पर खामोश रहता है।

न कोई शिकवा, न कोई शिकायत है,
बस समय के साथ बदलती इंसान की आदत है।

रिश्ते भी बदलते हैं, प्राथमिकताएँ भी बदलती हैं,
यही तो मानव स्वभाव है—
वक्त के साथ भावनाएँ भी बदलती हैं।
एक महीने पहले
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