फोन उठाना भी रिश्तों की कहानी कहता है,
किसे कितना चाहें, समय ही तय करता है।
कभी हर आवाज़ पर दिल दौड़ पड़ता था,
आज वही नाम स्क्रीन पर खामोश रहता है।
न कोई शिकवा, न कोई शिकायत है,
बस समय के साथ बदलती इंसान की आदत है।
रिश्ते भी बदलते हैं, प्राथमिकताएँ भी बदलती हैं,
यही तो मानव स्वभाव है—
वक्त के साथ भावनाएँ भी बदलती हैं।