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सुनता है जमाना दिल से

SATYENDRA KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उनकी बद्दुआओं से मैं बनता हूं
        
                                                    
                            
उनकी आलोचनाओं से मैं बनता हूं
सुनता है जमाना,दिल से जो मैं कहता हूं
जो देते गाली मुझे,उनके दिलों में मैं रहता हूं
मेरे दिल में स्वदेश प्यार पलता है
मेरे दिल से धुआं जो निकलता है
उस पर जमाना चलता है
दिल बहुत कुछ कहता है
मेरे अंदर धीरे धीरे कुछ कुछ सुलगता है
जिसमें जमाना झुलसता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
12 घंटे पहले
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