मेरा प्यारा हिंदुस्तान
मांग रहा बलिदान
दूंगा मैं बलिदान
दूंगा मैं योगदान
तन मेरा
मन मेरा
रक्त मेरा
आए स्वदेश के काम
आए विश्व के काम
इससे बढ़ कुछ भी तो नहीं है
स्वदेश हित जीना मरना मुझे तो यहीं है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'