वह मनमानी करता रहा
वह बेईमानी करता रहा
मैं नींद में नहीं थी
मैं सोई नहीं थी
लोक लाज के चलते मैं बोली नहीं
लोक लाज के चलते मैं मुंह खोली नहीं
वह मेरी मौन स्वीकृति समझता रहा
वह मेरे साथ गलत करता रहा
यही आज नारी का हाल है
जब नारी करती बवाल है
तब उसे समाज कहा कुलटा चरित्रहीन
जबकि पुरुष वर्ग था है रहेगा चरित्रहीन
अब हमें जगना है
बोलना है, विद्रोह करना है
अब नहीं हमें डरना है
अब हमें लड़ना है
अब हमें अड़ना है
जला दो बस्तियां सारी
उनकी जिन्होंने समझा हमें बेचारी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'