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अस्तित्व का द्वंद्व

Satyendra dwivedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं ज़िंदा हूँ या जीवित हूँ,
        
                                                    
                            
या कोर कल्पित हूँ।
मैं समर्थ हूँ या समर्पित हूँ,
या बेवज़ह चर्चित हूँ।
मैं अंबर हूँ या गर्जित हूँ,
या सर्वत्र वर्जित हूँ।
मैं भवन हूं या दर्शित हूं,
या सर्वदा तर्पित हूँ।
एक महीने पहले
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Manju Sharma

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