विज्ञापन

उनकी गली के जब हम

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उनकी गली के जब हम सुबह शाम फेरे लगाते थे
        
                                                    
                            
वो भी हमें देखे बगैर चैन कहाँ पाते थे ।

हमें देखते ही उनका चेहरा खिल उठता था
हसीन चेहरे पर कई चाँद नजर आते थे ।

बहुत सुकून मिलता था उनके दीदार से हमें
दिल के वीराने में, फूल खिल जाते थे ।

हमारी सुबह होती थी उनके ही नाम से
उनका नाम लेकर ही हम सो जाते थे ।

वादियों में मिलते थे जब किसी शाम हम
बाहों में आकर वो हाले-दिल सुनाते थे ।

होता था जब कभी जिक्र तन्हा रातों का
बेजुबां से होकर वो सीने से लग जाते थे ।
-सत्यपाल सिंह
6 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12470 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile