टूटते आशियाँ
जलती बस्तियां
रोते बिलखते
मासूम बच्चे
बिखरी लाशें
खामोश राहें
गरजती तोपें
उजड़ते शहर
क्या कहूँ इसे ?
इंसानो का जहाँ
नहीं !
यह नहीं हो सकता !
इंसानो का जहाँ।
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