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उजड़ते शहर

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            टूटते आशियाँ
        
                                                    
                            
जलती बस्तियां
रोते बिलखते
मासूम बच्चे
बिखरी लाशें
खामोश राहें
गरजती तोपें
उजड़ते शहर
क्या कहूँ इसे ?
इंसानो का जहाँ
नहीं !
यह नहीं हो सकता !
इंसानो का जहाँ।


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4 वर्ष पहले
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