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उजड़ते शहर

                
                                                         
                            टूटते आशियाँ
                                                                 
                            
जलती बस्तियां
रोते बिलखते
मासूम बच्चे
बिखरी लाशें
खामोश राहें
गरजती तोपें
उजड़ते शहर
क्या कहूँ इसे ?
इंसानो का जहाँ
नहीं !
यह नहीं हो सकता !
इंसानो का जहाँ।


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4 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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