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पहली बारिश

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पहली बारिश की हर बूंद
        
                                                    
                            
मानो कह रही हो
क्यूं बैठे हो चुपचाप
कैद तन्हाई में
यूं कब तक
निहारते रहोगे
उदास नजरों से
भीगते आँगन को
देखते रहोगे हमें
टप टप गिरते हुए
परवाह मत करो
आसमां में
डराने वाली
कड़कती बिजली की,
राहों पर फिसलन की
निकल पड़ो
प्रियतमा से मिलने
पुकारो उसे
दिल की खामोश सदा से
मुहब्बत के किस्से
गवाह हैं
जरूर सुनेगी वह
तुम्हारे कदमो की आहट
और बैठ जाएगी
सज संवर कर
नई दुल्हन की तरह
दर पर टिकाए
निगाहें
तुम्हारे इंतजार में
आतुर
तुमसे मिलने के लिए
बेचैन
छुपने के लिए
तुम्हारी बांहो मे ।।
4 वर्ष पहले
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