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पहली बारिश

                
                                                         
                            पहली बारिश की हर बूंद
                                                                 
                            
मानो कह रही हो
क्यूं बैठे हो चुपचाप
कैद तन्हाई में
यूं कब तक
निहारते रहोगे
उदास नजरों से
भीगते आँगन को
देखते रहोगे हमें
टप टप गिरते हुए
परवाह मत करो
आसमां में
डराने वाली
कड़कती बिजली की,
राहों पर फिसलन की
निकल पड़ो
प्रियतमा से मिलने
पुकारो उसे
दिल की खामोश सदा से
मुहब्बत के किस्से
गवाह हैं
जरूर सुनेगी वह
तुम्हारे कदमो की आहट
और बैठ जाएगी
सज संवर कर
नई दुल्हन की तरह
दर पर टिकाए
निगाहें
तुम्हारे इंतजार में
आतुर
तुमसे मिलने के लिए
बेचैन
छुपने के लिए
तुम्हारी बांहो मे ।।
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4 वर्ष पहले

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