तुमने नज़रें फेरी, दूरी बनाई तो क्या
मुझे हसरत-ए-दीदार आज भी है ।
क़समे-वफा, तुमने भुलाई तो क्या
मुझे तुमसे प्यार आज भी है ।।
मेरे तसव्वुर में हो तुम आज भी
पल-पल ख़यालों में रहती हो ।
क्यूँ भूली मुझे अश्कों में डुबोकर
बस इन सवालों में रहती हो ।।
अश्क पोंछने तुम न आई तो क्या
नम आँखों को इंतज़ार आज भी है ।।
वे मिलन की घड़ियां, मुलाकातों के पल
तुम्हारा वो बाते करना, हंसना हंसाना ।
बहारों के साए में, संग बैठ चमन में
फूलों की तरह महकना खिलखिलाना ।
तुमने वे शामें भुलाई तो क्या
मुझे उनसे सरोकार आज भी है ।।
-सत्यपाल सिंह