आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुझे तुमसे प्यार आज भी है

                
                                                         
                            तुमने नज़रें फेरी, दूरी बनाई तो क्या
                                                                 
                            
मुझे हसरत-ए-दीदार आज भी है ।
क़समे-वफा, तुमने भुलाई तो क्या
मुझे तुमसे प्यार आज भी है ।।

मेरे तसव्वुर में हो तुम आज भी
पल-पल ख़यालों में रहती हो ।
क्यूँ भूली मुझे अश्कों में डुबोकर
बस इन सवालों में रहती हो ।।
अश्क पोंछने तुम न आई तो क्या
नम आँखों को इंतज़ार आज भी है ।।

वे मिलन की घड़ियां, मुलाकातों के पल
तुम्हारा वो बाते करना, हंसना हंसाना ।
बहारों के साए में, संग बैठ चमन में
फूलों की तरह महकना खिलखिलाना ।
तुमने वे शामें भुलाई तो क्या
मुझे उनसे सरोकार आज भी है ।।
-सत्यपाल सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर