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मेरे शहर की फ़ितरत

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत बड़ा है
        
                                                    
                            
मेरा संगमरमर का शहर
यहाँ कदम-कदम पर
लोगों के मेले हैं ।
फिर सहमे सहमे से हैं
क्यूँ सब लोग यहाँ
भीड़ में भी क्यूँ
सब लगते अकेले हैं ।।

आम से जरा हटके है
मेरे शहर की फ़ितरत
यहाँ इंसानो के अपने साए भी
फ़ासला बनाकर चलते हैं ।

कुछ लोगों के लिए अलफ़ाज़
महज़ लबों का हिलना भर है
वे बातों ही बातों में
बात बदलते हैं ।।

 
4 महीने पहले
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