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जो दूर हैं..

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो दूर हैं उन्हें , ढूँढती हैं निगाहें,
        
                                                    
                            
जो पास हैं उनसे, हम मिलते नही है ।

जब रात का अंधेरा,
डराता है हमें,
दिन के उजाले,
याद आते हैं ।
फिर वजह क्या है,
किस डर से,
दिन में भी घर से
हम निकलते नहीं हैं ।।

फुर्सत के लम्हों मे,
करते हैं वादे,
मंज़िल तक हम
साथ चलेंगे ।
सफ़र मे मगर ,
हम सफ़र बनकर
दो कदम भी साथ,
हम चलते नहीं हैं ।।

सत्यपाल सिह

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4 वर्ष पहले
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