उसूलों को जिंदा रखना है
तो जिन्दगी तपानी होगी ।
चंद चेहरे होंगे, दोस्तों मे शुमार
भीड़ से दुश्मनी, निभानी होगी ।
कोई नहीं बोलेगा,तेरी जुबां बनकर
खुद बात अपनी, उठानी होगी ।
कदम कदम पर हैं, नकाबपोश यहाँ
असली सूरत उनकी, दिखानी होगी ।
हमें मालूम न था,सच सुनने पर
उन्हें इतनी, परेशानी होगी ।
उजालों के पीछे हैं, अंधेरों के डेरे
अब शमा नई,जलानी होगी ।
-सत्यपाल सिह
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