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जिन्दगी चली जा रही है

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिंदगी चली जा रही है ।
        
                                                    
                            
घड़ी घडी उम्र
निकली जा रही है ।।

बढ रहे हैं कदम
आखिरी मंजिल की ओर
पग-पग दूरी
घटी जा रही है ।।

सागर से उठी
उड़ी हवा के संग ।
बदरी को नही मालूम
वह कहाँ जा रही है ।।

तूफां में घिरी बुलबुल
मुश्किल में है बडी ।
गिरती संभलती
उड़ी जा रही है ।।

अभी-अभी सहर थी
दोपहर हो गई ।
बस इक पल में धूप
ढली जा रही है ।।

उदास चेहरों पर हंसी
ला सको तो लाओ ।
बांट लो जो तुम्हारे हिस्से
खुशी आ रही है ।।
-सत्यपाल सिंह
4 महीने पहले
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