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इजहार-ए-ख्याल (तारीफ़)

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हुस्न-आरा ही नहीं
        
                                                    
                            
वो अक्लमंद भी हैं ।
तन्हा सफ़र में भी
महफ़िलें सजा लेती हैं ।।

तेरी महकते गेसुओं की छांव में
इजाजत हो तो पनाह ले लूॅ ।
तेरे नाम से अपने सर
एक और गुनाह ले लूॅ ।।
-सत्यपाल सिंह
4 महीने पहले
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