हुस्न-आरा ही नहीं
वो अक्लमंद भी हैं ।
तन्हा सफ़र में भी
महफ़िलें सजा लेती हैं ।।
तेरी महकते गेसुओं की छांव में
इजाजत हो तो पनाह ले लूॅ ।
तेरे नाम से अपने सर
एक और गुनाह ले लूॅ ।।
-सत्यपाल सिंह
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