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हूँ भूला बिसरा गीत मैं

Satyapal Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सदियों से बजने वाला
        
                                                    
                            
होंठों पर सजने वाला ।
इस नए दौर के शोर में
हूँ भूला बिसरा गीत मैं ।।

मुझसे ज़माना नजर चुराए
या गवैया बनकर गाए ।
मुझे नहीं इससे सरोकार
पगला हूँ, है सब से प्यार ।
बन जाओ सखा तुम्हें सिखाऊं
प्रीत की सही रीत मैं ।।

रोज़ तुम्हें नए गीत मिलेंगे
नए सुर, नई धुन, संगीत मिलेंगे ।
बेशक उन्हें तुम अपना लोगे
पर क्या मुझे बुला दोगे ?
मुझे क्या मानो वो तुम जानो
सबको मानूँ अपना मीत मैं ।।
हूँ भूला बिसरा गीत मैं ।।
-सत्यपाल सिंह
4 महीने पहले
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