आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हूँ भूला बिसरा गीत मैं

                
                                                         
                            सदियों से बजने वाला
                                                                 
                            
होंठों पर सजने वाला ।
इस नए दौर के शोर में
हूँ भूला बिसरा गीत मैं ।।

मुझसे ज़माना नजर चुराए
या गवैया बनकर गाए ।
मुझे नहीं इससे सरोकार
पगला हूँ, है सब से प्यार ।
बन जाओ सखा तुम्हें सिखाऊं
प्रीत की सही रीत मैं ।।

रोज़ तुम्हें नए गीत मिलेंगे
नए सुर, नई धुन, संगीत मिलेंगे ।
बेशक उन्हें तुम अपना लोगे
पर क्या मुझे बुला दोगे ?
मुझे क्या मानो वो तुम जानो
सबको मानूँ अपना मीत मैं ।।
हूँ भूला बिसरा गीत मैं ।।
-सत्यपाल सिंह
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर