कुछ मैं मजबूर रहा,
कुछ वो मजबूर रहे ।
जमाने का पहरा था
दूर दूर रहे ।।
मुलाकात हो जाती तो
बात आस्मां तक जाती ।
फकत नजरें मिलने से
जमाने में मशहूर रहे ।।
पहरों से, फासलों से
कभी मुहब्बत मिटती नहीं ।
एहसास मिलन का रहा
क्या हुआ अगर दूर रहे ।।