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एहसास मिलन का

                
                                                         
                            कुछ मैं मजबूर रहा,
                                                                 
                            
कुछ वो मजबूर रहे ।
जमाने का पहरा था
दूर दूर रहे ।।

मुलाकात हो जाती तो
बात आस्मां तक जाती ।
फकत नजरें मिलने से
जमाने में मशहूर रहे ।।

पहरों से, फासलों से
कभी मुहब्बत मिटती नहीं ।
एहसास मिलन का रहा
क्या हुआ अगर दूर रहे ।।
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4 वर्ष पहले

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