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कैसे कह दूँ

satyanarayan gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बारिश की बूंदें
        
                                                    
                            
शीतल पुरवैया
तलते पकौड़े की खुश्बू
फिर भी
कैसे कह दूँ --
बरसात मुबारक!
उफनती नदियाँ
दरकती जमीन
खिसकते पहाड़
गिरती बिजलियाँ
कचरे के ढेर
फैलती बीमारियां
फिर
कैसे कह दूँ --
बरसात मुबारक!
एक घंटा पहले
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