होता है आसान ही, मूर्ख बनाना तात
समझाना यह मूर्ख को, बड़ी कठिन है बात
बड़ी कठिन है बात, उसे यह तक बतलाना
कौन यहाँ उपयोग, कर रहा खूब सयाना
' सत ' को देता मात, झूठ को ऐसे बोता
जो बन जाता मूर्ख, उसे मालूम न होता।
जीवन उस दिन खत्म है, जिस दिन चुप हों लोग
मुद्दों पर चुप साध कर, जनें भयंकर रोग
जनें भयंकर रोग, साध्य होना जो मुश्किल
उसको कर स्वीकार, जलेंगे दिल सब तिल-तिल
सतविंदर यदि शब्द, सही खो दें अपनापन
शव जैसी तब देह, मृत्यु सम होगा जीवन।