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सतविन्द्र राणा ' बाल ': चाहत क्या करें?

Satvinder Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी मिहनत ही है दौलत क्या करें,
        
                                                    
                            
छोड़ कर अब इसकी फितरत क्या करें?

फर्ज सबका, लें बचा आबो हवा,
दर्ज़ हैं कितनी, हिदायत क्या करें?

तुम पे आई हमने नजरें फेर लीं,
आज हम पे है मुसीबत क्या करें?

है मुवक्किल भी जुबां से दूर दूर,
न्याय पर फिर चुप अदालत, क्या करें?

बोल सीधे बोल कर सीधे हुए,
आ पड़ी अब सर पे आफ़त क्या करें?

हो मुताबिक सब यहां हर शख्स के,
चाह कर भी ऐसी जुर्रत क्या करें?

'बाल ' खुश रहना हमारी चाह है,
सब्र से उम्दा और चाहत क्या करें?
2 महीने पहले
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