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फलक से उतर कर ही आना पड़ेगा

Satish Borkar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फलक से उतर कर ही आना पड़ेगा
        
                                                    
                            
है दस्तूर तुम को निभाना पड़ेगा

तुम्हारी बहुत नाक ऊँची है लेकिन
किसी रोज तो सर झुकाना पड़ेगा

तुम्हारी ये चुप्पी तुम्ही को मुबारक
हमें सच से पर्दा उठाना पड़ेगा

ये जुमले तुम्हारे न आएंगे अब काम
तुम्हें काम कर के दिखाना पड़ेगा

धकेला है हमको जमीं पर ही अक्सर
हमें कुर्सी पर अब बिठाना पड़ेगा

फरेबों का तुमने बनाया महल है
किसी रोज इसको ढहाना पड़ेगा

हमी ने तुम्हें ताज पहनाया था कल
हमी कहते हैं तुम को जाना पड़ेगा
- सतीश बोरकर
एक घंटा पहले
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