तुम भुला देना
वो सारी कही अनकही बातें
वो सारे पल
जो हमने साथ गुजारें हैं
तुम भुला देना
वो रस्मे वो कसमें
वो चाँदनी रातें
जो हमने साथ गुजारें हैं
तुम भुला देना
वो किनारें नदी के
वो शाम जिन्दगी के
जो हमने साथ गुजारें हैं
तुम भुला देना
वो फूल बाग के
वो महक राग के
जो हमने साथ गुजारें हैं
तुम भुला देना
मेरी शक़्ल मेरी आदतें
मेरी शायरी मेरी गजलें
मेरे वजुद को भी
तुम भुला देना
पर
तुम न भुला देना
अपना प्यार
अपना वजुद........
- सतीश बोरकर