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अब नहीं आराम मुझको बेकरारी रख ली है

Satish Borkar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब नहीं आराम मुझको बेकरारी रख ली है
        
                                                    
                            
जाने वाला जा चुका पर यादें उसकी रख ली है

जानता हूँ फिर कभी उससे नहीं मिल पाउँगा
जाते जाते इसलिए उसकी निशानी रख ली है

चेहरा उसका देख लूंगा जब करेगा जी मेरा
पर्स में तस्वीर इक उसकी पुरानी रख ली है

कोई सुनता ही नहीं है कड़वी बातें आजकल
इसलिए अपनी जबाँ पे मैंने मिस्री रख ली है

सौदेबाजी इस मुहब्बत में बराबर की हुई
दिल के बदले उसकी चाहत हमने गिरवी रख ली है
- सतीश बोरकर
एक महीने पहले
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