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सावन का स्वागत

संतराम शर्मा 'हिन्दी'

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गगन मेघ से आच्छादित है,
        
                                                    
                            
देखो झूम के सावन आया।
महक उठी है धरती सारी,
उमंगित मानव मन हर्षाया।।

सावन तेरा रूप सुहाना,
हर मन में हलचल भर देता।
भावों की सूखी सलिला को,
प्रेम कणों से झिलमिल कर देता।।

अंबर में घिरी घनघोर घटाएँ,
रिमझिम बूंदें गिरा रही हैं।
प्यासी सूखी वसुधा हंस हंसकर,
सलिल कणों में नहा रही है।

हरित ओढ़नी आज ओढ़कर,
सज गया है सारा संसार।
भोलेनाथ के पावन चरणों में,
झुका है हर हृदय का प्यार।।
-संतराम शर्मा 'हिन्दी'
2 महीने पहले
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