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लेकिन किसी भी कीमत पर

Sarvesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बहुत दिनों के बाद आज, मैंने फिर अपनी कलम उठाई है,
        
                                                    
                            
दिल में जो दबा था दर्द, वही बात कागज़ पर आई है।
ज़रा सा प्यार ही माँगा था तुमसे, कोई बड़ा दावा नहीं किया,
तेरी एक मुस्कान की ख़ातिर, रब से भी मैंने रोकर माँगा था तुम्हें,
अगर तुम न मिले तो जीना छोड़ दूँगा,
आ जाओ वापस, बस यही फ़रियाद बार-बार दोहराई है।
और कितना लिखूँ मैं तेरी याद में, पन्ने भी अब कम पड़ने लगे हैं,
मेरी इस सादी सी फ़रियाद में, क्या कोई दम नज़र नहीं आता?
एक मुस्कान भी अगर तेरी मिल जाती, तो मेरा दिन सँवर जाता,
पर तुम्हारे जाने के बाद, अब मुझमें मेरा कुछ बाकी नहीं रह जाता।
तुमने शुरू में कहा था कि तुम्हें मुझसे बेइंतहा प्यार है,
पर अब मुझे तुम्हारी इतनी आदत हो गई है कि जीना दुश्वार है।
प्लीज़ मुझे यूँ छोड़ कर मत जाओ, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह पाऊँगा,
तुम कहो तो अपने परिवार, यहाँ तक कि अपनी जान भी दे दूँ,
लेकिन किसी भी कीमत पर, मैं तुम्हें कभी नहीं खोना चाहता... |
-सर्वेश यादव
2 महीने पहले
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