विज्ञापन

प्यार का पागलपन

Sarthak Piyush

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुनिया की नजरों में जो नादान दिखता है,
        
                                                    
                            
वही तो इस जहाँ में सबसे अमीर बिकता है।
हँसते हैं लोग देखकर उसकी दीवानगी को,
पर उसे तो हर जरें में बस महबूब दिखता है।

क्या हो रहा है दिल में, यह कैसे वो बताए,
शब्द कम पड़ जाते हैं, जब वो मुस्कुराए।
यह एक ऐसा समंदर है जिसका कोई छोर नहीं,
जो डूबा इसमें, वही इसकी गहराई जान पाए।

यह वो खामोश भाषा है जो आँखों से बहती है,
बिना कुछ कहे भी दिल की हर बात कहती है।
जमाने की बंदिशें इसे कभी रोक नहीं पातीं,
यह रूह की वो डोर है जो उम्र भर रहती है।

लोग ढूंढते हैं खुदा को पत्थरों के मकानों में,
पर सच्चा आशिक उसे पाता है इन अफसानों में।
यह पागलपन नहीं, यह तो बंदगी का एक रूप है,
जो खिलती है छाँव में और निखरती हर धूप है।

बाकी सब तो बस तमाशा समझकर हँसते हैं,
उन्हें क्या पता कि इस पागलपन में कितने सुकून बसते हैं।
जो प्यार करे, वही इस पावन अहसास को पहचाने,
बाकी सारी दुनिया तो इसे सिर्फ पागलपन ही माने।

-: सार्थक पियुष सिंह
15 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kahar

5 कविताएं

View Profile