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उन्हें खास समझ कर जीते हैं।

Sarthak Piyush

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अक्सर हम अपनों पर ही,
        
                                                    
                            
अंधा विश्वास कर लेते हैं।
वो दिल के सबसे पास हैं जो,
उन्हें खास समझ कर जीते हैं।

पर कुछ दरिंदे अपनों में,
मजबूरी का लाभ उठाते हैं।
कमजोर समझ कर लोगों को,
वो अपना शिकार बनाते हैं।

लगा के मुखौटा अपनों का,
जो पीठ पे खंजर मार रहे।
वो जीत रहे दुनिया शायद,
पर खुद का ईमान हार रहे।

कमजोरी को जो ढाल बनाकर,
मासूम का दिल दुखाते हैं।
वो भूल गए इस दुनिया में,
सब कर्म लौट कर आते हैं।

छल करके वो मासूमों से,
खुद पर ही गर्व मनाते हैं।
क्या जीत लिया संसार उन्होंने,
मन ही मन वो मुस्काते हैं।

क्या पा लोगे तुम छल करके,
क्या वैभव साथ ले जाओगे?
जब आँख खुलेगी सच के आगे,
तुम खुद को तन्हा पाओगे।

ये झूठी हँसी, ये झूठा गर्व,
बस कुछ लम्हों का मेला है।
जो पाप की राह पे चलता है,
वो अंत में बिल्कुल अकेला है।

पर भूल रहे वो पापी मन,
यह अंत नहीं, बस शुरुआत है।
जो गलत किया है तुमने आज,
वो कल खुद ही की मात है।

क्या सच में अंदर से खुश हो,
या बस ये झूठा साया है?
अपनों को धोखा देकर तो,
सिर्फ तुमने खुद को गंवाया है।
2 घंटे पहले
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