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अंबर का श्रृंगार

Sarthak Piyush

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तपती धरती, व्याकुल मन था,
        
                                                    
                            
चातक का प्यासा जीवन था।
तभी गगन में बादल छाए,
शीतल पावन संदेशा लाए।

नभ से उतरीं नन्हीं बूंदें,
मानो बंद कपाट को मूंदें।
रिमझिम रिमझिम राग सुनाती,
वर्षा की बूंदें मुस्काती।

हर एक बूंद की एक पुकार,
आओ मिलकर करें श्रृंगार।

धो दें इस जग की सब धूल,
खिल जाएं उपवन के फूल।

तभी अचानक चमत्कार हुआ,
अंबर का अद्भुत रूप दिखा।
सात रंगों की अविरल धारा,
सज गया सुंदर नभ हमारा।

इंद्रधनुष ने ली अंगड़ाई,
चारों ओर छटा बिखराई।
सज गई सुंदर नीली गगन,
देख प्रकृति का हर्षाया मन।

-: सार्थक पियुष सिंह
2 महीने पहले
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