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अकेले चलो, काफिला मत ढूंढो

Santosh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक दो नहीं साहब यहां लाखों यार होंगे
        
                                                    
                            
अगर दिन हुए अच्छे तो रिश्ते हजार होंगे

तुम जरा ढलते वक्त में परखना इन्हें
जरूरत पर नकली चेहरे तार तार होंगे

भ्रम मत पालना की यहाँ सब तुम्हारे है
बड़ी मुश्किल से अर्थी में कांधे चार होंगे

अकेले चलो काफिला मत ढूंढो
क्योंकि भीड़ में दुश्मन बेशमार होंगे

ज़माने की रीत यही है,
मतलब की दुनिया है
जो आज झुक रहे हैं
कल सिर पर सवार होंगे

सच्चे वही हैं जो खामोशी से, थामें हाथ तुम्हारा
बाकी सब शोर मचाते,
राहों के गुबार होंगे

- संतोष कुमार सिंह 
4 घंटे पहले
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