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‘‘इश्क़ बहुत खूबसूरत है’’

Santosh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क़ बहुत खूबसूरत है,
        
                                                    
                            
पर हमें इश्क़ से नफ़रत है।

आँखों में जो सपने बोए,
हासिल बस एक ज़हमत है।

वो ख्वाब जो महका करते,
अब दर्द का ये नग़मा है।

जिसे वफ़ा का नाम दिया था,
उसकी रग-रग में खयानत है।

चाँदनी भी अब डसने लगी है,
हर रात यहाँ बस वहशत है।

मोहब्बत के अब किस्से सुनकर,
हँसी भी आती, हैरत है।

इश्क़ बहुत खूबसूरत है,
पर हमें इश्क़ से नफ़रत है।

टूटे दिलों को कौन समझाए,
हर एक आँख में हसरत है।

दिल तोड़ने का फ़न सीखा है,
अब इश्क़ नहीं ये तिजारत है।

हर लफ़्ज़ में आग लगा दें,
ये दर्द भी अपनी इबादत है।

फिर भी कलम से इश्क़ लड़े हम,
घाव भरें या क़यामत है।

इश्क़ बहुत खूबसूरत है,
पर हमें इश्क़ से नफ़रत है।
 
2 महीने पहले
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