ऐसे नहीं तो वैसे सही ;
लड़ना क्यों जब सबको रहना है यहीं ;
मरने के बाद सबकी भलाई ही सिर्फ याद रही ;
दूध की तरह बहना नहीं तो सीखो जमना जैसे दही
ऐसे नहीं तो वैसे सही ;
कर्म के हिसाब से जो चाहोगे मिलेगा वही ;
'कर्म ही पूजा है' यही बात महापुरुषों ने कही ;
साम, दाम, दंड और भेद से कामयाबी को कहो नहीं
ऐसे नहीं तो वैसे सही ;
सदकर्मों से ही विकास की गंगा हमेशा बही ;
अपनी प्रतिभा से लगा दो सफलता की तही ;
अपने काबलियत पर रखो भरोसा क्योंकि तुम हो जही
[श्री संतोष कुमार सिंह : हिंदी और अंग्रेजी कवि]