आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ऐसे नहीं तो वैसे सही

                
                                                         
                            ऐसे नहीं तो वैसे सही ;
                                                                 
                            
लड़ना क्यों जब सबको रहना है यहीं ;
मरने के बाद सबकी भलाई ही सिर्फ याद रही ;
दूध की तरह बहना नहीं तो सीखो जमना जैसे दही

ऐसे नहीं तो वैसे सही ;
कर्म के हिसाब से जो चाहोगे मिलेगा वही ;
'कर्म ही पूजा है' यही बात महापुरुषों ने कही ;
साम, दाम, दंड और भेद से कामयाबी को कहो नहीं

ऐसे नहीं तो वैसे सही ;
सदकर्मों से ही विकास की गंगा हमेशा बही ;
अपनी प्रतिभा से लगा दो सफलता की तही ;
अपने काबलियत पर रखो भरोसा क्योंकि तुम हो जही

[श्री संतोष कुमार सिंह : हिंदी और अंग्रेजी कवि]
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर