विज्ञापन

ख्वाब

santosh DRDO

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज रात सपने में
        
                                                    
                            
मेरी मौत हो गयी
जब मैं मरा.....
मैं बहुत खुश हुआ
नया नाम , नयी पहचान
और मैं भी नया था
बड़े प्यार से मेरा पुनर्जन्म हुआ था |

मैं इस बार कोई गलती नहीं करना चाहता
खुश रहना , प्यार करना
जिंदगी का नया वादा था ,
हां ! प्यार से याद आया
हजारों मील चलकर....
मैं उन सभी औरतों से मिलने जाऊंगा
जिन्हें मैं एक बार गले लगाना चाहता था |

लेकिन अपने ख्वाबों के समुंदर से ,
मुझे डर भी लगता है
उनमे डूब जाने का
एक बार फिर से मर जाने का
हजारों मील चलते - चलते
सपनो की चौखट पर पहुंचने से पहले
ठंड में सिकुड़ी बुढ़िया की तरह
मेरी आँखे भी जम गयी है
अगली सुबह के इंतजार में
तुम्हारी छाँव में सुकून है ,
इस अँधेरे में नहीं....
यही फ़र्क़ बताने को
कैसे बीत गई पूरी जिंदगी ?
अपनी महबूबा को गले लगाने को |

इससे पहले कि तुम फिर कुछ कहो
मैं ही कह देता हूं....
अब किसी से मिलना नहीं है मुझे
ना पुनर्जन्म की ख्वाहिश है मेरी , और
ना हीं किसी से शिकायत है कोई
बस थोड़ा बुरा लगता है ,ये सोचकर
की सपने में ही मौत हो गई और
किसी ने जगाया भी नहीं | |
 संतोष यदुवंशी 


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Neet Biology

14 कविताएं

View Profile

Prem Narayan

4402 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

654 कविताएं

View Profile

Anand Tewary

415 कविताएं

View Profile