आज रात सपने में
मेरी मौत हो गयी
जब मैं मरा.....
मैं बहुत खुश हुआ
नया नाम , नयी पहचान
और मैं भी नया था
बड़े प्यार से मेरा पुनर्जन्म हुआ था |
मैं इस बार कोई गलती नहीं करना चाहता
खुश रहना , प्यार करना
जिंदगी का नया वादा था ,
हां ! प्यार से याद आया
हजारों मील चलकर....
मैं उन सभी औरतों से मिलने जाऊंगा
जिन्हें मैं एक बार गले लगाना चाहता था |
लेकिन अपने ख्वाबों के समुंदर से ,
मुझे डर भी लगता है
उनमे डूब जाने का
एक बार फिर से मर जाने का
हजारों मील चलते - चलते
सपनो की चौखट पर पहुंचने से पहले
ठंड में सिकुड़ी बुढ़िया की तरह
मेरी आँखे भी जम गयी है
अगली सुबह के इंतजार में
तुम्हारी छाँव में सुकून है ,
इस अँधेरे में नहीं....
यही फ़र्क़ बताने को
कैसे बीत गई पूरी जिंदगी ?
अपनी महबूबा को गले लगाने को |
इससे पहले कि तुम फिर कुछ कहो
मैं ही कह देता हूं....
अब किसी से मिलना नहीं है मुझे
ना पुनर्जन्म की ख्वाहिश है मेरी , और
ना हीं किसी से शिकायत है कोई
बस थोड़ा बुरा लगता है ,ये सोचकर
की सपने में ही मौत हो गई और
किसी ने जगाया भी नहीं | |
संतोष यदुवंशी
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