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जब मुल्क ने विश्वविद्यालयों से कहा

santosh DRDO

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काश !
        
                                                    
                            
मेरी आबो-हवा
थोड़ी और तबीयत से बह जाती
तो यह धुआँ भी जल्दी से छट जाता
मैं ना जाने कबसे तुम्हारी सीढ़ियों पर
अपनी सांसे रोककर बैठा हूं | |
~ संतोष यदुवंशी



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6 वर्ष पहले
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Anil Pandey

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