काश !
मेरी आबो-हवा
थोड़ी और तबीयत से बह जाती
तो यह धुआँ भी जल्दी से छट जाता
मैं ना जाने कबसे तुम्हारी सीढ़ियों पर
अपनी सांसे रोककर बैठा हूं | |
~ संतोष यदुवंशी
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