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santosh DRDO

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            " वह समझदार है ,
        
                                                    
                            
मगर किसी की तारीफ का इंतजार नहीं करती
पढ़ने में अच्छी है ,
मगर नुमाइश में इश्तेहार नहीं लिखती
खूबसूरत है बहुत ,
मगर दूसरों के लिए श्रृंगार नहीं करती
मेरी सांसो का मानसून उठ -उठकर
उसके होठों पर वर्षा करती है
मगर वो है की....
बूंदों का हिसाब नहीं रखती
ना जाने कौन सी बेड़िया है
उसके पैरों में पड़ी....
कहती तो है कि प्यार करती हूं बहुत
मगर कभी मोहब्बत की बात नहीं करती | |
~ संतोष यदुवंशी


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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