इतनी ठोकरें मिली मुझे ज़माने से,
कि जूते भी अब नागुजार लगे |
थक गयी है नींदे मेरी,
कि रातें भी अब नागुजार लगे |
सोचा जाकर बैठ जाऊँ वीरान में कहीं,
बेवफ़ा बादल भी अब वहीं बरसने लगे |