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इतनी ठोकरें मिली मुझे ज़माने से

Santosh barupal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इतनी ठोकरें मिली मुझे ज़माने से,
        
                                                    
                            
कि जूते भी अब नागुजार लगे |
थक गयी है नींदे मेरी,
कि रातें भी अब नागुजार लगे |
सोचा जाकर बैठ जाऊँ वीरान में कहीं,
बेवफ़ा बादल भी अब वहीं बरसने लगे |
13 घंटे पहले
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