बादलों की बात है निराली
काली-काली घटा घिर आई
देखो! कैसी छवि छाई
बादल हैं पानी के दाता
हम सबको देते भर-भर न्योता ॥
प्यारे बादल घुंघराले बादल
ओढ़ कर आ जाओ चादर
दूर गगन में फैले बिखेरे
हर तरफ फैले बिखेरे
जल धारण करके आ जाओ
हर कृषक की तकदीर बनाओ
तुम, दूर गगन के सच्चे वीर
आओ बैठो खा लो खीर
अद्भुत सलोने रूप तुम्हारे
हर क्षण केश (बाल) को सँवारे
विचरण करते हो बनकर कुंआरे
इन्द्रधनुष पास तिहारे
रण-भूमि में कभी नहीं हारे
रहते हो बनकर सबके प्यारे
कविता की अनोखी तस्वीर बनाओ
मेरे प्यारे अब तुम आ जाओ।