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रक्षा-बंधन

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रक्षा-बंधन का पावन त्यौहार,
        
                                                    
                            
आओ हम सब हाथ मिलाएं।
पनप रही जो कटुता मन में,
अपने दिल से उसे मिटाएं ।।

भाई-बहन का यह त्यौहार,
बिछुड़े गले मिलाता है ।
वर्षों से मुरझाए हैं जो,
उन चेहरों को खिलाता है ।।

हम सब भी तो मिले गले,
एक दूजे को राखी बांध।
आज सुरक्षा का संकल्प लें,
वृक्षों को भी राखी बांध ।।

सच्चे अर्थों में यह बंधन,
जीव मात्र का एक दूजे से ।
पशु-पक्षी को राखी बांधो,
जुड़ें सभी हम एक दूजे से।।

ईश्वर की संतान सभी हैं,
सबका आपस में नाता ।
रक्षा का यह पवित्र-पर्व,
हम सबको है यही बताता ।।

भूले-भटके दुःखियों को भी,
संग अपने तुम साधो ।
प्रेम का बंधन यह राखी है,
उन्हें प्रेम बंधन में बांधों ।।
एक घंटा पहले
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