गाय चराने चले कन्हैया,
साथ में हलधर भैया,
ग्वाल-बाल सब मगन फिरत हैं,
झूम रही हैं गैंया ।
उछल रहे हैं बछड़े देखो,
गावैं खूब गवैया
कोई दौड़त, कोई नाचत,
कोई चढ़ा पिठैयां ।
झूम रही है टोली पूरी,
हर्षें यशुदा मैया,
ना लगे कोई जादू टोना,
ना हीं कोई बलैया ।
हे ईश्वर ! विनती मैं करती,
नटखट मेरा कन्हैया ।
ग्वाल-बाल संग चला, बना है–
मधुबन धेनु चरैया,
लता ओट से राधा झांके,
चितवति किशन-कन्हैया ।
दूर जा रहे कान्हा मुझसे,
रूठ गए क्यों दैया,
पशु-पक्षी सब निरखि रहे
पवन बहे पुरवैया ।
पूरब से सूरज भी झांके,
नाचे ता-ता थैया ।।