देखो! हिम्मत कभी न हारो,
पुनः-पुनः पतवार सम्हारों।
देखो हिम्मत कभी न हारो ।।
असफल हुए हजारों बार,
भले गिरे हो बारंबार ।
फिर भी मानों कभी न हार,
कदम बढ़ा मग में दो-चार।।
बना न खुद को तुम लाचार,
मग पत्थर को ठोकर मारो ।
देखो! हिम्मत कभी न हारो।।
छूट चुके हों संगी-साथी,
भले साथ ना घोड़ा-हाथी।
फिर भी सरपट दौड़ लगा,
जय की मन में आस जगा।
खुद को तुम फौलाद बनाकर,
सभी विपत्ति को टारो।
देखो हिम्मत कभी न हारो ।
भले ही अपने ठोकर मारें,
हुए पराए अपने सारे ।
जग बैरी हो चाहे सारी,
देते लोग सभी हों गारी।।
सत्य मार्ग मत छोड़ो तुम,
उठो, पुनः ललकारो ।
देखो हिम्मत कभी न हारो ।।
मार्ग कठिन हो चाहे जितना,
पवन कंपाये चाहे जितना ।
हो बरसाता सूरज आग,
चाहे फन फैलाए बैठे नाग ।।
काँप उठे यह सारे जिससे,
ऐसा तुम निज तेज पसारो।
देखो! हिम्मत कभी न हारो।।
बढ़ता जा तूं शान से प्यारे,
झुक जाएंगे एक दिन सारे।
जला सकेंगी ना अंगारे,
डिगा सकेंगी ना बौछारें ।।
ठान कर अपने मन में तुम जो,
लक्ष्यमार्ग पर कदम को धारो,
देखो! हिम्मत कभी न हारो।।