पापा, क्यों कुछ लोग बजाते–
इतना जोर-जोर से गाने ?
जो आया जी में इनके,
लगते उसे बजाने ।।
फूहड़ गाने लोग बजाते,
आती नहीं उन्हें क्यों शर्म ?
यह गायक क्या गाते हैं,
कैसे करते ये कुत्सित कर्म ?
बहुत बेशर्म होते ये लोग,
जो फूहड़ गाने गाते ।
हम बच्चे भी शर्माते हैं,
पर ये क्यों न शर्माते ?
लाज-हाय सब धोकर पी गए,
क्या ये भोजपुरी गायक?
समाज को ये क्या सिखा रहे,
हैं ये कैसे नालायक।।
इन पर अंकुश कौन लगाए,
क्या किसी को इसकी फिक्र?
उम्र कैद हो इन सबको,
इसकी होती क्यों न जिक्र ?
अंकुश लगाने में इन पर,
है सरकारें क्यों अक्षम ?
इन पर जो प्रतिबंध लगाए,
क्या कोई नहीं है सक्षम ?
कैसे सहते इनके घर वाले,
जन्म दिए कैसे इनको ?
माँ-बाप ने क्या सिखलाया,
पाला-पोषा कैसे इनको ?
इन पर तो अभियोग लगाकर,
ठोकें कई मुकदमा ।
या फिर काल-कोठरी में डालें,
या हो जाए इन्हें दमा।।
ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों!
कुछ तो तुम सब शर्म करो ।
क्यों वायु में जहर घोलते,
अब तो तुम सत्कर्म करो ।।
डीजे और लाउडस्पीकर वाले,
हरते सबका सुख–चैन ।
हर वक्त ये बेचैन हैं रहते,
दिन हो या कि रैन ।
कोई तो आगे आए ऐसा,
जो लगा सके इन पर प्रतिबंध।
बहुत फैल चुका अब ना फैले,
यह फुहड़पन का दुर्गंध ।।